तेजी से बदलते मध्य पूर्व राजनयिक परिदृश्य में इजरायल-हमास युद्ध के बीच भारत के पास पूरे क्षेत्र को मार्गदर्शन देने का महत्वपूर्ण मौका है। हमास के अप्रत्याशित आतंकी हमले के बाद भारत ने साफ किया है कि वह आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी और स्पष्ट रूप से निंदा करता है। साथ ही भारत ने एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य का समर्थन भी किया है।
इजरायल-हमास युद्ध के बीच भारत की भूमिका
उल्लेखनीय है कि मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक वास्तविकता का सामना करते हुए, भारत भी अपनी कूटनीति को पुनः व्यवस्थित और पुनर्स्थापित कर रहा है।प्रमुख उदाहरण के तौर पर ‘क्वाड’ जैसे I2U2 का निर्माण है, जिसमें भारत, इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। समूह का लक्ष्य जल संसाधन, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में संयुक्त निवेश और नई पहल पर सहयोग करना है। एक व्यापक ‘भारत-अब्राहम गठबंधन’ की भी बात की जा रही है, जिसमें न केवल I2U2, बल्कि मिस्र और सऊदी अरब भी शामिल हों, ताकि शक्ति का एक अनुकूल संतुलन बनाया जा सके, जो पश्चिम एशिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखे।
इसके साथ ही भारत की अगुवाई में दिल्ली में संपन्न हुए G20 शिखर सम्मेलन में अत्यंत महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट इंडिया-मिडिल ईस्ट इकनॉमिक कॉरिडोर को लॉन्च किया गया। इनके साथ ही मध्य पूर्व में स्थिरता भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अरब देशों के साथ इसके संबंधों के अलावा, बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी इस क्षेत्र में रहते हैं और काम करते हैं।
इजरायल-हमास संघर्ष विराम प्रस्ताव से भारत ने बनाई दूरी
ऐसे में भारत पारम्परिक गुटनिरपेक्ष, संतुलित विदेश नीति के फ्रेमवर्क को आंशिक रूप से तोड़कर मध्य पूर्व में उभर रहे नए प्रतिमान में शामिल होने का रास्ता तलाश रहा है। हमास की ओर से इजरायल पर किए गए आतंकवादी हमले और फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह पर इजरायल की ‘युद्ध’ की घोषणा जैसे हालात में अब भारत की राजनयिक महत्वाकांक्षाओं के लिए एक परीक्षा है।
