जनता की समस्याओं से बेखबर विपक्ष, आखिर किसके लिए लड़ रहा है सत्ता की लड़ाई?
संपादकीय | PoliticianMirror.com
देश की राजनीति में आज विपक्ष के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उसकी लड़ाई आखिर किसके लिए है—आम आदमी के अधिकारों के लिए या सत्ता की कुर्सी के लिए? जब देश का सामान्य नागरिक अपने परिवार के बेहतर भविष्य, रोजगार, महँगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर चिंतित है, तब विपक्ष की राजनीति का केंद्र क्या वास्तव में जनता की समस्याएँ हैं, या उसकी सारी ऊर्जा नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने और सत्ता तक पहुँचने की रणनीति बनाने में खर्च हो रही है?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि जनता के सामने एक बेहतर विकल्प प्रस्तुत करना भी है। सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन जनता के सवालों का जवाब देना उसकी जिम्मेदारी भी है।
मोदी सरकार योजनाओं के जरिए जनता तक पहुँचने का प्रयास कर रही है, विपक्ष के पास क्या है विकल्प?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जनधन योजना और जल जीवन मिशन जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आम नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया है। इन योजनाओं की सफलता का आकलन उनके वास्तविक क्रियान्वयन, पात्र लाभार्थियों तक पहुँच और जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों से होना चाहिए। जहाँ कमियाँ हैं, वहाँ सवाल उठने चाहिए और सुधार भी होना चाहिए।
लेकिन विपक्ष से भी उतना ही सीधा सवाल पूछा जाना चाहिए—क्या उसके पास इन योजनाओं से बेहतर विकल्प हैं? क्या वह बता सकता है कि गरीब परिवारों, किसानों, महिलाओं और युवाओं की समस्याओं को दूर करने के लिए उसकी ठोस कार्ययोजना क्या है? यदि सरकार की नीतियों में कमियाँ हैं, तो उन कमियों को दूर करने का उसका अपना मॉडल क्या है?
आखिर केवल विरोध की राजनीति से आम आदमी की जिंदगी कैसे बदलेगी?
जनता को यह जानने का अधिकार है कि जो दल सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, वे स्वयं कौन-सी नीतियाँ लागू करना चाहते हैं। केवल आलोचना करके राजनीतिक जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।
हर मुद्दे पर विरोध, लेकिन समाधान कहाँ?
जब भी सरकार कोई निर्णय लेती है, राजनीतिक बहस में विरोध और आरोप-प्रत्यारोप सामने आते हैं। सरकार की गलतियों को उजागर करना विपक्ष का लोकतांत्रिक कर्तव्य है, लेकिन क्या उसका कर्तव्य केवल यहीं तक सीमित है?
महँगाई पर सवाल है, तो राहत का ठोस रास्ता क्या है? रोजगार पर सवाल है, तो युवाओं के लिए अवसर पैदा करने की योजना क्या है? किसानों की समस्याओं पर चिंता है, तो उनकी आय और कृषि व्यवस्था में सुधार के लिए व्यावहारिक प्रस्ताव क्या हैं? शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर आपत्ति है, तो बेहतर व्यवस्था का खाका कहाँ है?
देश को केवल यह सुनने में दिलचस्पी नहीं हो सकती कि सरकार क्या गलत कर रही है। जनता यह भी जानना चाहती है कि विपक्ष सही क्या करेगा।
विरोध करना आसान है, विकल्प देना राजनीतिक नेतृत्व की असली परीक्षा है।
क्या विपक्ष की प्राथमिकता जनता है या सत्ता की कुर्सी?
विपक्षी दलों के सामने नेतृत्व, गठबंधन, चुनावी समीकरण और राजनीतिक अस्तित्व जैसी चुनौतियाँ हो सकती हैं। लेकिन आम नागरिक का सवाल इससे अलग है। उसे राजनीतिक दलों की आंतरिक चुनौतियों से अधिक अपने जीवन की समस्याओं की चिंता है।
उसे जानना है कि उसके बच्चों को बेहतर शिक्षा कैसे मिलेगी, युवाओं को रोजगार कैसे मिलेगा, किसान की मुश्किलें कैसे कम होंगी और परिवार का खर्च कैसे संभलेगा। ऐसे में विपक्ष को यह स्पष्ट करना होगा कि उसकी राजनीतिक लड़ाई इन सवालों के समाधान से किस तरह जुड़ी है।
यदि विपक्ष का अधिकांश राजनीतिक विमर्श केवल मोदी सरकार के विरोध के इर्द-गिर्द दिखाई देता है, तो उसे यह बताना होगा कि सरकार बदलने की मांग के साथ वह व्यवस्था बदलने के लिए क्या प्रस्ताव रख रहा है। केवल सत्ता परिवर्तन की मांग करना और जनजीवन में सुधार की रूपरेखा देना दो अलग-अलग बातें हैं।
देश को सत्ता की लड़ाई के दावेदार नहीं, जनता की समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करने वाले राजनीतिक दल चाहिए।
मोदी सरकार से सवाल तो विपक्ष से जवाब क्यों नहीं?
लोकतंत्र में सरकार से जवाब माँगना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी विपक्ष की जवाबदेही भी है। यदि सरकार से उसके वादों का हिसाब माँगा जा सकता है, तो विपक्ष से उसकी नीतियों और विकल्पों का हिसाब क्यों नहीं माँगा जाना चाहिए?
यदि विपक्ष सरकार की योजनाओं को अपर्याप्त बताता है, तो वह अपनी योजनाओं का विवरण सामने रखे। यदि वह सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करता है, तो अपनी आर्थिक प्राथमिकताएँ स्पष्ट करे। यदि वह जनता के हितों की बात करता है, तो यह भी बताए कि उन हितों की रक्षा के लिए उसने संसद, विधानसभाओं और सार्वजनिक जीवन में कौन-से ठोस प्रयास किए हैं।
राजनीति में सवालों से बचने का अधिकार किसी को नहीं है। सत्ता पक्ष से जवाब माँगने वाला विपक्ष भी जनता के सवालों के प्रति जवाबदेह है।
जनता केवल आरोप नहीं, काम का हिसाब चाहती है
भारत का मतदाता राजनीतिक नारों और चुनावी वादों के साथ-साथ अपने अनुभवों, योजनाओं के लाभ, स्थानीय समस्याओं और नेताओं के कामकाज को भी देखता है। इसलिए किसी भी दल के लिए जनता का विश्वास जीतने का रास्ता ठोस कार्यों और विश्वसनीय नीतियों से होकर गुजरता है।
मोदी सरकार को भी अपनी योजनाओं की सफलता, कमियों और जनता को मिले वास्तविक लाभ का हिसाब देना होगा। इसी तरह विपक्ष को भी यह बताना होगा कि वह केवल सरकार की आलोचना करने के बजाय आम नागरिक के जीवन में सुधार लाने के लिए क्या कर रहा है।
लोकतंत्र में विपक्ष कमजोर हो या मजबूत, उसकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। लेकिन उसकी प्रासंगिकता केवल इस बात से तय नहीं होती कि वह सरकार के खिलाफ कितनी आवाज उठाता है; यह भी मायने रखता है कि वह जनता की समस्याओं को कितनी गंभीरता से उठाता है और उनके समाधान के लिए क्या विकल्प देता है।
अब विपक्ष को जनता के सामने जवाब देना होगा
क्या विपक्ष के पास बेरोजगारी, महँगाई और किसानों की समस्याओं से निपटने की कोई स्पष्ट कार्ययोजना है? क्या वह जनता को बता सकता है कि सत्ता में आने पर उसकी प्राथमिकताएँ क्या होंगी? क्या वह अपनी राजनीति को केवल सरकार के विरोध से आगे ले जाकर जनहित के ठोस कार्यक्रमों से जोड़ने के लिए तैयार है?
ये सवाल केवल राजनीतिक बहस के नहीं, लोकतांत्रिक जवाबदेही के सवाल हैं। विपक्ष को इनका उत्तर अपने काम, नीतियों और जनता के बीच अपनी सक्रियता से देना होगा।
अंततः सत्ता की कुर्सी किसी राजनीतिक दल का लक्ष्य हो सकती है, लेकिन जनता का कल्याण राजनीति का आधार होना चाहिए। यदि विपक्ष सत्ता प्राप्त करना चाहता है, तो उसे जनता के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि वह सत्ता में आने के लिए ही संघर्ष कर रहा है या वास्तव में जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए भी उसके पास ठोस दृष्टि और कार्ययोजना है।
क्योंकि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके नाम पर राजनीति करने वाले दलों की प्राथमिकता क्या है—जनता की परेशानी दूर करना या सत्ता की कुर्सी तक पहुँचना?
अब सवाल सीधा है: विपक्ष मोदी सरकार का विकल्प बनना चाहता है, तो क्या वह जनता के सामने समाधान का विकल्प भी प्रस्तुत करेगा?
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